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Saturday, May 30, 2020

स्वास्थ्यकर्मियों से मारपीट पर हो सकती है 7 साल की जेल, अध्यादेश जारी

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स्वास्थ्यकर्मियों से मारपीट पर हो सकती है 7 साल की जेल, अध्यादेश जारीनई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में शामिल स्वास्थ्यकर्मियों पर हमलों की पृष्ठभूमि में बुधवार को एक अध्यादेश को मंजूरी दी। इसमें स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को गैर जमानती अपराध माना गया है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। जावड़ेकर ने कहा कि प्रस्तावित अध्यादेश में स्वास्थ्यकर्मियों के घायल होने व संपत्ति को नुकसान पहुंचने पर भी मुआवजे का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित अध्यादेश के माध्यम से महामारी अधिनियम 1897 में संशोधन किया जाएगा। इससे स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कर्मियों की सुरक्षा और उनके रहने व काम करने की जगह को हिंसा से बचाने में मदद मिलेगी। अध्यादेश में हिंसा का दोषी पाए जाने पर छह महीने से सात साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

गृह मंत्री अमित शाह ने अध्यादेश पर कहा कि यह अध्यादेश डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा। गृहमंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार उन लोगों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है जो इस चुनौतीपूर्ण समय के दौरान भारत की रक्षा कर रहे हैं। हमारे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कार्यकतार्ओं के खिलाफ हिंसा को समाप्त करने के लिए अध्यादेश लाना उसी बात का प्रमाण है। यह उनकी सुरक्षा और गरिमा को सुनिश्चित करने में एक लंबा रास्ता तय करेगा।”

दरअसल, कोरोना के खिलाफ लड़ाई में लगे स्वास्थ्यकर्मियों पर देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहीं हमले की घटनाओं को देखते हुए डॉक्टरों में आक्रोश रहा। जिस पर डॉक्टरों ने बुधवार की रात सांकेतिक प्रदर्शन और गुरुवार को काला दिवस मनाने का ऐलान किया था। जिसके बाद जहां बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन(आईएमए) के प्रतिनिधियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग कर उन्हें सुरक्षा का भरपूर भरोसा दिया था। जिसके बाद आईएमए ने सांकेतिक प्रदर्शन का इरादा छोड़ दिया।

वहीं प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में महामारी रोग अधिनियम 1897 में संशोधन और अध्यादेश को मंजूरी दी गई। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा। अध्यादेश में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले को गैर-जमानती बताया गया है।अगर डॉक्टर और स्वास्थकर्मी को गंभीर चोट आई तो आरोपी को छह महीने से सात साल तक की सजा, और 1 लाख से लेकर 5 लाख तक का जुमार्ना लगाया जा सकता है।

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