राघव चड्ढा ने की भारत में पितृत्व अवकाश कानून की मांग, जानें वर्तमान में क्या हैं नियम

सिर्फ मां ही क्यों, बच्चों की परवरिश में पिता का भी तो बराबर का हक है! क्या अब भारत में पिताओं को भी बच्चों की देखभाल के लिए लंबी छुट्टी मिलेगी?

सीधे शब्दों में कहें तो, अब ‘पेरेंटिंग’ को सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी मान लेने वाला दौर पीछे छूटने वाला है।

बच्चों की देखभाल के लिए अब पिताओं को भी मिलेगी छुट्टी? राघव चड्ढा ने संसद में उठाई बड़ी मांग

आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने देश के लाखों पिताओं और होने वाले पिताओं के हक में एक बड़ी आवाज उठाई है। उन्होंने संसद में मांग की है कि भारत में भी ‘पैटर्निटी लीव’ यानी पिता को मिलने वाली छुट्टी के लिए एक ठोस कानून बनना चाहिए।

क्या है मामला

इस मामले में सामने आया है कि राघव चड्ढा ने राज्यसभा में ‘पैटर्निटी बेनिफिट बिल’ पेश करने की वकालत की है। उनका कहना है कि जब बच्चा पैदा होता है, तो उसकी देखभाल की जिम्मेदारी जितनी मां की होती है, उतनी ही पिता की भी होनी चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल भारत के प्राइवेट सेक्टर में पिता को छुट्टी देने का कोई अनिवार्य नियम नहीं है। राघव चड्ढा चाहते हैं कि सरकार इसे एक कानूनी अधिकार बना दे, ताकि पुरुष भी बिना किसी डर या सैलरी कटने की चिंता के अपने बच्चे के साथ वक्त बिता सकें।

जानकारी के मुताबिक, इस प्रस्ताव का मकसद समाज की उस पुरानी सोच को बदलना है जिसमें माना जाता है कि बच्चों को पालना सिर्फ महिलाओं का काम है। इससे वर्कप्लेस पर भी लैंगिक समानता (Gender Equality) आएगी।

मुख्य बातें

  • प्राइवेट सेक्टर में पिताओं के लिए छुट्टी का कोई केंद्रीय कानून नहीं है।
  • केंद्र सरकार के कर्मचारियों को फिलहाल केवल 15 दिन की छुट्टी मिलती है।
  • नया प्रस्ताव पिताओं को मां की तरह ही लंबी और सवेतन छुट्टी दिलाने की मांग करता है।
  • इसका मकसद बच्चों की परवरिश में पिता की भागीदारी को बढ़ाना है।

पृष्ठभूमि

भारत में साल 1961 के ‘मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट’ के तहत मां बनने वाली महिलाओं को 26 हफ्ते की सवेतन छुट्टी मिलती है। लेकिन पुरुषों के लिए ऐसा कोई मजबूत कानून अब तक नहीं बना है। हालांकि, जोमैटो और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कुछ बड़ी कंपनियां अपनी मर्जी से पैटर्निटी लीव देती हैं, लेकिन छोटे और मंझोले उद्योगों में ऐसी कोई सुविधा नहीं है।

यह क्यों मायने रखता है

यह कानून आम आदमी की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकता है। अक्सर नई मां पर अकेले बच्चे को संभालने का भारी दबाव होता है, जिससे उनके करियर पर बुरा असर पड़ता है। अगर पिता को भी छुट्टी मिलेगी, तो घर का काम और बच्चे की जिम्मेदारी आपस में बंट जाएगी। यह न केवल महिलाओं को वापस काम पर लौटने में मदद करेगा, बल्कि पिता और बच्चे के बीच के रिश्ते को भी मजबूत करेगा।

अंत में समझिए

राघव चड्ढा की यह पहल सुनने में आधुनिक और जरूरी लगती है। अगर यह कानून बन जाता है, तो भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जो परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाने के लिए पुरुषों को भी बराबर का मौका देते हैं। अब देखना यह है कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।

यह लेख विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर सरल रूप में तैयार किया गया है।

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