क्या आप भी ऑफिस में काम करते वक्त बार-बार होने वाले डिस्टर्बेंस से परेशान रहते हैं? संभल जाइए, क्योंकि एक नई रिपोर्ट के मुताबिक भारत इस मामले में पूरी दुनिया को पीछे छोड़ रहा है!
सीधे शब्दों में कहें तो, भारतीय दफ्तरों में अब काम कम और रुकावटें ज्यादा होने लगी हैं।
ऑफिस में शांति से काम करना हुआ मुश्किल? रिपोर्ट में खुलासा—भारतीय कर्मचारी दुनिया में सबसे ज्यादा परेशान!
एक ताज़ा रिपोर्ट ने भारतीय वर्कप्लेस की पोल खोलकर रख दी है। इसके मुताबिक, भारत में ऑफिस के काम के बीच आने वाली बाधाएं (disruptions) अब एक गंभीर समस्या बन चुकी हैं, जो कर्मचारियों की मानसिक शांति और काम, दोनों को प्रभावित कर रही हैं।
क्या है मामला
इस मामले में सामने आया है कि भारत के करीब 86 प्रतिशत कर्मचारी अपने काम के दौरान किसी न किसी तरह की रुकावट या डिस्टर्बेंस महसूस करते हैं। यह आंकड़ा दुनिया के बाकी देशों के औसत से कहीं ज्यादा है, जो चिंता का विषय है।
रिपोर्ट के अनुसार, बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन, बिना मतलब की लंबी मीटिंग्स और काम के बीच में मिलने वाले दूसरे छोटे-मोटे टास्क कर्मचारियों का ध्यान भटका रहे हैं। इससे लोग अपने मुख्य काम पर फोकस नहीं कर पा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, काम के इस बढ़ते बोझ और बार-बार होने वाले हस्तक्षेप की वजह से भारतीय कर्मचारियों में स्ट्रेस बढ़ रहा है। वे अपनी शिफ्ट खत्म होने के बाद भी मानसिक रूप से काम से ही उलझे रहते हैं।
मुख्य बातें
- भारत में 86% कर्मचारी काम के दौरान होने वाली रुकावटों से जूझ रहे हैं।
- यह संख्या वैश्विक औसत (Global Average) के मुकाबले बहुत अधिक है।
- गैर-जरूरी मीटिंग्स और डिजिटल मैसेजिंग ऐप्स को डिस्टर्बेंस की सबसे बड़ी वजह माना गया है।
- लगातार होने वाले इन डिस्टर्बेंस की वजह से काम की क्वालिटी पर बुरा असर पड़ रहा है।
पृष्ठभूमि
पिछले कुछ सालों में तकनीक जितनी बढ़ी है, ऑफिस का काम उतना ही डिजिटल हो गया है। पहले जो बातचीत आमने-सामने होती थी, अब वह हर वक्त बजने वाले ईमेल और मैसेज नोटिफिकेशन में बदल गई है। हाइब्रिड और रिमोट वर्क कल्चर ने भी काम और निजी जिंदगी के बीच की लकीर को धुंधला कर दिया है, जिससे कर्मचारी हर वक्त ‘ऑन ड्यूटी’ महसूस करते हैं।
यह क्यों मायने रखता है
यह खबर हर उस इंसान के लिए जरूरी है जो नौकरी करता है। अगर काम के बीच बार-बार रुकावट आएगी, तो काम पूरा करने में ज्यादा समय लगेगा। इसका सीधा असर आपकी पर्सनल लाइफ और सेहत पर पड़ता है। अगर ऑफिस का माहौल नहीं सुधरा, तो आने वाले समय में ‘बर्नआउट’ (पूरी तरह थक जाना) की समस्या और बढ़ सकती है।
अंत में समझिए
कुल मिलाकर बात यह है कि सिर्फ घंटों तक काम करना ही काफी नहीं है, बल्कि काम को शांति और बिना किसी रुकावट के करना भी जरूरी है। अब समय आ गया है कि कंपनियां अपने कर्मचारियों को ऐसा माहौल दें जहाँ वे बिना किसी बेवजह के डिस्टर्बेंस के अपने टैलेंट का सही इस्तेमाल कर सकें।
यह लेख विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर सरल रूप में तैयार किया गया है।