दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु में कोविड मामलों में हल्की बढ़ोतरी

देश के प्रमुख शहरों में एक बार फिर कोविड़-19 के मामले बढ़ने लगे हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और गुड़गांव जैसे बड़े महानगरों में हल्के लक्षणों वाले नए केस सामने आए हैं। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय और डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन ऐहतियात बरतना ज़रूरी है।

दिल्ली की बात करें तो करीब तीन साल बाद 23 नए कोविड़ केस सामने आए हैं। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि सभी मरीजों की हालत स्थिर है और उन्हें फ्लू जैसे सामान्य लक्षण हैं। कुछ मरीज निजी अस्पतालों में भर्ती हैं, बाकियों को मॉनिटर किया जा रहा है। सरकार ने अस्पतालों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं—ऑक्सीजन, बेड्स और जरूरी दवाइयों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही, सभी पॉजिटिव सैंपल्स को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा जा रहा है ताकि नए वेरिएंट की पहचान समय रहते हो सके।

मुंबई में मई महीने में अब तक 95 केस दर्ज किए गए हैं, जो महाराष्ट्र के जनवरी से अब तक के कुल 106 मामलों में से बड़ा हिस्सा हैं। 16 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं और संक्रमित मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित किया जा रहा है। गंभीर लक्षण वाले सभी मामलों में जांच अनिवार्य की गई है, खासकर ILI (Influenza Like Illness) और SARI (Severe Acute Respiratory Infection) के तहत।

बेंगलुरु में भी 35 सक्रिय मामलों में से 32 केस सामने आए हैं। इनमें एक नौ महीने का शिशु भी शामिल है, जिसका इलाज वाणी विलास अस्पताल में चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से कोविड अनुकूल व्यवहार बनाए रखने की अपील की है, खासकर बुज़ुर्गों और पहले से बीमार लोगों को।

हरियाणा में भी गुरुग्राम और फरीदाबाद में दो-दो मामले सामने आए हैं। इन सभी में लक्षण बहुत मामूली हैं और मरीज होम आइसोलेशन में हैं। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री अर्ची सिंह राव ने कहा कि किसी को डरने की जरूरत नहीं है, पर निगरानी लगातार जारी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक ये नए केस ओमिक्रॉन वेरिएंट की सब-लाइनेंज JN.1 और उसके वंशज LF.7 और NB1.8 से जुड़े हो सकते हैं। यह वेरिएंट पहले से मौजूद इम्युनिटी को चकमा देने में सक्षम है, लेकिन इसके लक्षण बहुत गंभीर नहीं हैं। अधिकतर मरीजों में हल्का बुखार, गले में खराश, खांसी जैसे फ्लू वाले लक्षण दिखाई दे रहे हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि मास्क पहनना, हाथ धोना और भीड़भाड़ से बचना अब भी जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जो बुजुर्ग हैं या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है। कोविड के मामले अब स्थानिक (endemic) स्तर पर पहुंच चुके हैं, यानी यह अब हमारे बीच रहने वाला वायरस है। ऐसे में समझदारी इसी में है कि हम लापरवाह न हों, पर डरें भी नहीं।

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