चाचा ने ही भतीजे के पैरों के नीचे से कालीन खींच ली! चिराग पासवान के साथ जो हुआ, उसने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है।
यानी साफ है कि अपनों की बगावत ने चिराग को उनकी ही पार्टी में बेगाना बना दिया है।
चिराग पासवान अकेले पड़े: पार्टी में बड़ी टूट के बाद नीतीश कुमार की पार्टी ने कहा- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’
लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) में एक बहुत बड़ा उलटफेर हुआ है। चिराग पासवान के चाचा पशुपति कुमार पारस ने पार्टी के सांसदों के साथ मिलकर चिराग को किनारे कर दिया है, जिससे पार्टी दो हिस्सों में बंटती नजर आ रही है।
क्या है मामला
इस मामले में सामने आया है कि चिराग के चाचा पशुपति पारस ने पार्टी के 5 अन्य सांसदों के साथ हाथ मिला लिया है। इन सांसदों ने चिराग पासवान को संसदीय दल के नेता पद से हटाकर पशुपति पारस को अपना नया नेता चुन लिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, चिराग पासवान को इस बगावत की भनक तक नहीं लगी। जब तक वह कुछ समझ पाते, तब तक उनके चाचा ने पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी। अब चिराग अपनी ही पार्टी में अलग-थलग पड़ गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार की पार्टी JDU ने इस पूरे घटनाक्रम पर चुटकी ली है। उनका कहना है कि चिराग ने जो बीज बोए थे, आज वही फसल काट रहे हैं।
मुख्य बातें
- चिराग के चाचा पशुपति पारस ने 5 सांसदों के साथ मिलकर बगावत कर दी है।
- सांसदों के गुट ने पशुपति पारस को अपना नया नेता मान लिया है।
- नीतीश कुमार की पार्टी JDU ने इसे चिराग की गलतियों का नतीजा बताया है।
- रामविलास पासवान की विरासत को लेकर अब चाचा और भतीजे में सीधी जंग छिड़ गई है।
पृष्ठभूमि
रामविलास पासवान के निधन के बाद से ही पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था और नीतीश कुमार के खिलाफ जमकर बयानबाजी की थी। चिराग के इसी अड़ियल रुख से पार्टी के कई पुराने नेता और उनके चाचा नाराज चल रहे थे।
यह क्यों मायने रखता है
यह खबर बिहार की राजनीति और चिराग पासवान के भविष्य के लिए बहुत अहम है। चिराग खुद को पीएम मोदी का ‘हनुमान’ बताते थे, लेकिन अब उनकी अपनी ही लंका में आग लग गई है। इससे यह समझ आता है कि राजनीति में सिर्फ जोश नहीं, बल्कि परिवार और अनुभवी नेताओं को साथ लेकर चलना कितना जरूरी है।
अंत में समझिए
पॉलिटिक्स में कब कौन पाला बदल ले, कुछ कहा नहीं जा सकता। चिराग पासवान ने जो दांव नीतीश कुमार को कमजोर करने के लिए खेला था, आज वही दांव उन पर भारी पड़ता दिख रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या चिराग इस मुश्किल वक्त से बाहर निकल पाएंगे या उनके हाथ से पार्टी पूरी तरह निकल जाएगी।
यह लेख विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर सरल रूप में तैयार किया गया है।