लैंसेट रिपोर्ट: दुनिया भर में होने वाली हर 10 में से एक मातृ मृत्यु भारत में

एक नई जान को दुनिया में लाना किसी भी महिला के जीवन का सबसे सुखद अहसास होता है, लेकिन इसी सफर के साथ जुड़ी कुछ स्वास्थ्य चुनौतियां आज भी एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई हैं। हाल ही में चिकित्सा जगत की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘लैंसेट’ की एक रिपोर्ट ने मातृ मृत्यु दर को लेकर जो आंकड़े पेश किए हैं, वे हमें ठहरकर सोचने पर मजबूर कर देते हैं।

इस रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में होने वाली कुल मातृ मृत्यु में से हर दसवीं मौत भारत में होती है। यह आंकड़ा न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह भी बताता है कि तमाम आधुनिक सुविधाओं और विकास के बावजूद हम अपनी माताओं को पूरी तरह सुरक्षित रखने के मामले में अभी पीछे हैं। हालांकि बीते कुछ दशकों में भारत ने इस दिशा में काफी सुधार किया है और मृत्यु दर में कमी भी आई है, लेकिन आंकड़ों की यह गहराई बताती है कि एक बड़ा तबका अब भी बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच से काफी दूर है।

सुरक्षित मातृत्व की राह में आज भी हैं कई चुनौतियां

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर हर जगह एक जैसा नहीं है। अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में जागरूकता की कमी और ऐन वक्त पर अस्पताल न पहुंच पाना सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरता है। गर्भावस्था के दौरान सही पोषण का न मिलना और एनीमिया यानी शरीर में खून की कमी जैसी परेशानियां प्रसव के दौरान जोखिम को कई गुना बढ़ा देती हैं। जब तक स्वास्थ्य सेवाओं का बुनियादी ढांचा और सही जानकारी हर घर तक नहीं पहुंचेगी, तब तक इन दुखद आंकड़ों को पूरी तरह कम करना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

सिर्फ सरकारी नीतियां या अस्पताल ही नहीं, बल्कि एक समाज के तौर पर हमारी भी यह जिम्मेदारी है कि हम गर्भवती महिलाओं की देखभाल को अपनी प्राथमिकता बनाएं। नियमित जांच और डॉक्टरी सलाह को नजरअंदाज करना कई बार जानलेवा साबित हो सकता है। यह समझना बेहद जरूरी है कि प्रसव के बाद के शुरुआती हफ्ते भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं जितने कि गर्भावस्था के नौ महीने। इस दौरान होने वाली छोटी सी लापरवाही भी बड़े खतरों को बुलावा दे सकती है, इसलिए परिवार का भावनात्मक और शारीरिक सहयोग इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाता है।

अंततः, ये आंकड़े हमें डराने के लिए नहीं बल्कि जागरूक करने के लिए हैं। अगर हम सही समय पर सही कदम उठाएं, खान-पान का पूरा ध्यान रखें और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का सही तरीके से लाभ उठाएं, तो मातृत्व के इस सफर को हर महिला के लिए सुरक्षित और खुशहाल बनाया जा सकता है। एक स्वस्थ माँ ही एक स्वस्थ और खुशहाल भविष्य की सबसे मजबूत नींव होती है।

Continue reading