बदलते मौसम और बढ़ती गर्मी का असर न सिर्फ हमारी त्वचा या पाचन पर पड़ता है, बल्कि यह हमारे दिमाग की सेहत को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। अक्सर लोग इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन तेज धूप और उमस कई बार न्यूरोलॉजिकल समस्याओं, खास तौर पर दौरों (seizures) का बड़ा कारण बन सकती है।
गर्मियों के दौरान हमारे शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाला सिस्टम काफी दबाव में होता है। जब बाहर का पारा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो शरीर से पसीना अधिक निकलता है, जिससे डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी होने लगती है। यह स्थिति हमारे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बिगाड़ देती है, जो दिमाग की नसों के सही तरीके से काम करने के लिए बेहद जरूरी होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब शरीर में सोडियम और पोटैशियम जैसे जरूरी तत्वों की कमी होती है, तो दिमाग की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी में गड़बड़ी हो सकती है, जो दौरों या फिट्स की वजह बन जाती है।
गर्मी में दिमागी सेहत का ख्याल रखना क्यों जरूरी है?
तेज धूप में लंबे समय तक बाहर रहना या लू की चपेट में आना सीधे तौर पर हमारे नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है। जिन्हें पहले से ही मिर्गी या कोई अन्य दिमागी समस्या है, उनके लिए गर्मी के ये दिन और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं क्योंकि तपिश की वजह से होने वाली नींद की कमी और शारीरिक थकान भी दौरों को बढ़ाने का काम करती है। ऐसे में यह बहुत जरूरी है कि हम सिर्फ प्यास लगने का इंतजार न करें, बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें ताकि शरीर का तापमान स्थिर बना रहे।
सिर्फ पानी पीना ही काफी नहीं है, बल्कि अपनी डाइट में मौसमी फलों और तरल पदार्थों को शामिल करना भी दिमागी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। खीरा, तरबूज और नारियल पानी जैसे विकल्प शरीर में जरूरी मिनरल्स की भरपाई करते हैं और दिमाग को शांत रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा, अगर आप वर्कआउट या एक्सरसाइज करते हैं, तो कोशिश करें कि यह या तो सुबह जल्दी हो या फिर शाम को सूरज ढलने के बाद, ताकि शरीर पर बेवजह गर्मी का तनाव न पड़े।
गर्मी के इस मौसम में खुद को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है कि हम अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करें। अगर आपको या आपके किसी परिचित को बहुत ज्यादा सिरदर्द, चक्कर आना या अचानक घबराहट महसूस हो रही है, तो इसे गर्मी की सामान्य थकावट मानकर टालें नहीं। अपनी सेहत को प्राथमिकता देना और समय रहते सावधानी बरतना ही आपको किसी भी बड़ी मेडिकल इमरजेंसी से बचा सकता है।