लिवर की ये बीमारी अब तेजी से बढ़ रही है.. अगर ये लक्षण दिखें, तो तुरंत सावधान हो जाएं

क्या आपको कभी बिना किसी वजह के थकान महसूस होती है या पेट के दाहिने हिस्से में हल्का दर्द रहता है, लेकिन आप उसे नजरअंदाज कर देते हैं। यही वो संकेत हो सकते हैं, जिन्हें हम अक्सर मामूली समझकर टाल देते हैं, लेकिन कई बार यही एक बड़ी समस्या की शुरुआत होते हैं।

फैटी लिवर ऐसी ही एक “साइलेंट” समस्या है, जो धीरे-धीरे बढ़ती है और कई बार तब पता चलती है जब यह गंभीर रूप ले चुकी होती है। रिपोर्ट्स के अनुसार दुनियाभर में करोड़ों लोग इस समस्या से प्रभावित हैं, और भारत में भी इसका दायरा तेजी से बढ़ रहा है ।

फैटी लिवर क्या है और कैसे शुरू होता है

हमारा लिवर शरीर का एक अहम अंग है, जो भोजन को ऊर्जा में बदलने और शरीर को डिटॉक्स करने का काम करता है। सामान्य रूप से इसमें थोड़ा फैट होना जरूरी होता है, लेकिन जब यह मात्रा 5 प्रतिशत से ज्यादा हो जाती है, तो इसे फैटी लिवर कहा जाता है ।

समस्या तब शुरू होती है जब यह फैट धीरे-धीरे बढ़ता जाता है और लिवर की कार्यक्षमता को प्रभावित करने लगता है।

ग्रेड 1: जब बीमारी दिखती ही नहीं

फैटी लिवर का पहला चरण सबसे खतरनाक इसलिए होता है क्योंकि इसमें लक्षण लगभग दिखाई ही नहीं देते। इस स्टेज पर लिवर में 5 से 33 प्रतिशत तक फैट जमा होता है ।

कभी-कभी हल्की थकान या पेट में मामूली असहजता हो सकती है, लेकिन ज्यादातर लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर समस्या को गंभीर बना देती है।

ग्रेड 2: जब शरीर संकेत देने लगता है

जैसे-जैसे लिवर में फैट बढ़ता है, शरीर संकेत देने लगता है। इस स्टेज में 34 से 66 प्रतिशत तक फैट जमा हो सकता है ।

इस दौरान भूख कम लगना, पेट में सूजन, खाना न पचना और थकान जैसे लक्षण सामने आने लगते हैं। कई लोगों में त्वचा में पीलापन या अचानक वजन बढ़ने जैसे बदलाव भी देखे जाते हैं।

यह वह समय होता है जब अगर ध्यान दिया जाए, तो स्थिति को संभाला जा सकता है।

ग्रेड 3: जब खतरा गंभीर हो जाता है

फैटी लिवर का तीसरा चरण सबसे खतरनाक होता है। इसमें लिवर में 67 प्रतिशत से ज्यादा फैट जमा हो जाता है ।

इस स्टेज पर लिवर में सूजन बढ़ जाती है और सिरोसिस या लिवर कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। मरीज को तेज थकान, पेट में दर्द, उल्टी जैसा महसूस होना और शरीर में सूजन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

कई मामलों में लिवर ट्रांसप्लांट तक की जरूरत पड़ सकती है।

क्यों बढ़ती है ये समस्या

फैटी लिवर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। अनियंत्रित डायबिटीज, मोटापा, जंक फूड, ज्यादा शराब पीना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी इसके बड़े कारण माने जाते हैं ।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती स्टेज में इसका पता नहीं चलता, और जब तक पता चलता है, तब तक स्थिति काफी आगे बढ़ चुकी होती है।

क्या इसे रोका जा सकता है

अच्छी बात यह है कि फैटी लिवर एक ऐसी स्थिति है, जिसे सही समय पर पहचान लिया जाए तो इसे काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।

वजन नियंत्रित रखना, संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना और शराब से दूरी बनाना इसके नियंत्रण में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं।

अंत में एक जरूरी चेतावनी

अगर आपको लगातार थकान, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द या अचानक वजन में बदलाव महसूस हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें।

क्योंकि यह बीमारी शोर नहीं करती, लेकिन जब असर दिखाती है, तो बहुत देर हो चुकी होती है।

इसलिए समय रहते अपने शरीर के संकेतों को समझना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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