
डिजिटल स्वतंत्रता और पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर एक अहम बहस फिर से सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े पर है। “4PM न्यूज़” नामक यूट्यूब चैनल, जिसके 73 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं, को “राष्ट्रीय सुरक्षा” के नाम पर अचानक ब्लॉक कर दिया गया — और सबसे चिंताजनक बात यह है कि ना तो कोई कारण बताया गया, ना ही कोई आधिकारिक आदेश साझा किया गया।
कोर्ट का संज्ञान: “दूसरी पार्टी को भी सुनना ज़रूरी”
सुप्रीम कोर्ट की बेंच जिसमें जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन शामिल हैं, ने सोमवार को केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब तलब किया। याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के ज़रिये दायर की गई थी, जिन्होंने कहा:
“मुझे किसी तरह का नोटिस नहीं मिला। मुझे सिर्फ़ यूट्यूब से एक मेल आया जिसमें बताया गया कि चैनल ब्लॉक कर दिया गया है। ये पूरी कार्रवाई ‘ex-facie’ असंवैधानिक है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि “पूरे चैनल को बिना किसी कारण के बंद कर दिया गया, और मैं अभी तक ये भी नहीं जानता कि मेरे ख़िलाफ़ आरोप क्या हैं।”
याचिकाकर्ता का पक्ष: “ये सिर्फ़ एक चैनल नहीं, एक लोकतांत्रिक अधिकार है”
4PM न्यूज़ के संपादक संजय शर्मा की याचिका में दावा किया गया है कि चैनल को ब्लॉक करना “पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सीधा हमला” है। उन्होंने कहा:
“धारा 19(1)(a) के तहत नागरिकों को सूचना देने और विचारों के आदान-प्रदान का अधिकार प्राप्त है। राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर ऐसी स्वतंत्र आवाज़ों को चुप कराना संवैधानिक मूल्यों के ख़िलाफ़ है।”
याचिका में मांग की गई है कि केंद्र सरकार को ब्लॉकिंग आदेश की प्रति, कारण और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया जाए।
चुनौती: IT नियमों पर भी सवाल
याचिका में IT ब्लॉकिंग रूल्स 2009 की कई धाराओं (Rule 8, 9, और विशेष रूप से Rule 16) को गैर-संवैधानिक करार देते हुए इनको निरस्त करने की मांग की गई है। Rule 16 के अनुसार, सभी ब्लॉकिंग आदेशों को गोपनीय रखा जाता है — जिसे याचिकाकर्ता ने “प्रक्रियात्मक न्याय के खिलाफ़” बताया।
“राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था कोई ‘तावीज़’ नहीं हैं कि उनके नाम पर किसी भी कार्यवाही को न्यायिक जांच से मुक्त कर दिया जाए।”
याचिका में यह भी कहा गया कि Section 69A के तहत सरकार कोई भी ब्लॉकिंग आदेश बिना उचित प्रक्रिया और स्पष्ट कारण बताए पारित नहीं कर सकती।
पृष्ठभूमि में क्या?
शर्मा का दावा है कि Pahalgam आतंकी हमले के बाद उनकी टीम ने जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था की विफलता पर सवाल उठाए थे। इसके बाद 29 अप्रैल को यूट्यूब से एक ईमेल आया जिसमें बताया गया कि उनका चैनल ब्लॉक कर दिया गया है — कोई स्पष्ट कारण या आदेश नहीं दिया गया।

