
भारत सरकार द्वारा बुधवार, 7 मई को एक बड़े पैमाने पर सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है। यह अभ्यास देश के 250 से अधिक ज़िलों में होगा और इसका मक़सद है — भारत की आपातकालीन तैयारियों की जांच और मज़बूती।
इस मॉक ड्रिल की टाइमिंग और पैमाना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई, जिनमें अधिकतर पर्यटक थे। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव साफ़ महसूस किया जा रहा है।
ऐसे माहौल में ये अभ्यास लोगों के मन में कई सवाल भी खड़े कर रहा है। चलिए, हर अहम पहलू को आसान भाषा में समझते हैं।
🇮🇳 मॉक ड्रिल क्यों हो रही है? इसका मक़सद क्या है?
गृह मंत्रालय के निर्देश पर ये ड्रिल इसलिए कराई जा रही है क्योंकि आज की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों (geo-political threats) में भारत को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है — जैसे एयर रेड्स, मिसाइल हमले या बड़े आतंकी हमले।
इस ड्रिल का मक़सद है: “हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को युद्ध जैसे हालात में नागरिक सुरक्षा (civil defence) के लिए पूरी तरह से तैयार करना।”
ड्रिल में सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि ज़रूरत पड़ने पर —
- एयर रेड सायरन तुरंत काम करें,
- लोगों तक मोबाइल अलर्ट समय पर पहुंचे,
- ब्लैकआउट लागू किया जा सके,
- निकासी और बचाव की योजनाएं सुचारू ढंग से लागू हो सकें।
📍 क्या होगा मॉक ड्रिल के दौरान?
सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, ये चीज़ें शामिल होंगी:
✅ Air Raid Sirens का परीक्षण — ज़ोरदार सायरनों की आवाज़ सुनाई दे सकती है
✅ Crash Blackout Exercise — कुछ क्षेत्रों में लाइट्स को अचानक बंद किया जाएगा
✅ Emergency Communication Check — वायुसेना से सीधे संपर्क के लिए हॉटलाइन चेक होगी
✅ Control Room Activation — कंट्रोल रूम और शैडो कंट्रोल रूम्स एक्टिव होंगे
✅ कैमोफ्लाजिंग — अहम सरकारी/सैन्य ठिकानों को छिपाने की तकनीक का परीक्षण
✅ Evacuation Drill — इवैक्यूएशन यानी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का अभ्यास
✅ बंकरों की सफाई और फिर से उपयोग की तैयारी
✅ छात्रों, नागरिकों को ट्रेन्ड किया जाएगा — जैसे युद्ध जैसी स्थिति में कैसे खुद को सुरक्षित रखा जाए
📱 मोबाइल फोन पर अलर्ट कैसे आएंगे?
भारत सरकार का डिजास्टर अलर्ट सिस्टम अब मोबाइल फोन्स तक रियल टाइम में चेतावनियाँ भेजने की क्षमता रखता है।
🔹 Android फोन (Android 11 या उससे ऊपर)
- Settings > Safety & Emergency > Wireless Emergency Alerts > Enable करें
🔹 iPhone पर
- Settings > Notifications > Government Alerts (नीचे स्क्रॉल करें) > Test Alerts ऑन करें
सितंबर 2024 में दिल्ली-एनसीआर के लोगों को ऐसा ही एक buzzing अलर्ट मिला था जिसमें लिखा था — “This is a SAMPLE TESTING MESSAGE…”
यह सिस्टम National Disaster Management Authority और Department of Telecommunication की निगरानी में काम करता है।
⚡ क्या बिजली चली जाएगी? क्या बैंक या स्कूल बंद होंगे?
नहीं। किसी भी ज़िले में बैंक, स्कूल, कॉलेज या दफ्तर बंद नहीं होंगे। यह मॉक ड्रिल एक simulation है, यानी अभ्यास। लेकिन कुछ चुनिंदा जगहों पर क्रैश ब्लैकआउट के तहत थोड़ी देर के लिए बिजली बंद की जा सकती है — ताकि यह देखा जा सके कि युद्ध जैसी स्थिति में रोशनी बंद कर पाना कितना संभव और प्रभावी है।
🧑🚒 कौन-कौन ले रहा है भाग?
ये ड्रिल एक सामूहिक अभ्यास है जिसमें शामिल हैं:
- सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स
- होम गार्ड्स
- NCC और NSS जैसे छात्र संगठन
- स्थानीय पुलिस बल
- फायर ब्रिगेड, रेस्क्यू टीमें, वार्डन
- आम नागरिक भी, खासकर स्कूल-कॉलेज के छात्र
🧘♀️ क्या आम जनता को चिंता करनी चाहिए?
बिलकुल नहीं। यह एक पूर्व-निर्धारित अभ्यास है और सरकार का सिर्फ़ एक उद्देश्य है — “आपातकालीन परिस्थितियों में हर स्तर पर तत्परता”।
लोगों से अनुरोध है कि इस दौरान अफवाहों से बचें, अलर्ट या निर्देशों को शांति से सुनें और सहयोग करें।
🧭 देश के लिए क्या है यह अभ्यास का महत्व?
साल 1968 से लागू Civil Defence Act के तहत भारत ने युद्धकालीन तैयारियों का एक ढांचा खड़ा किया था। आज का यह अभ्यास उसी ढांचे को अपग्रेड और एक्टिवेट करने का प्रयास है — लेकिन अब टेक्नोलॉजी, कम्युनिकेशन और पब्लिक इंगेजमेंट के नए स्तरों के साथ।
यह सिर्फ एक ड्रिल नहीं, देश की सामूहिक सुरक्षा का अभ्यास है।

