रेज़िलिएंट भविष्य की रूपरेखा: मोदी बोले, अब नहीं करेंगे इंतज़ार

फ्रांस के नीस शहर में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा-रोधी ढांचे की आवश्यकता को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में रखने की पुरज़ोर वकालत की। ‘कोस्टल क्षेत्रों के लिए आपदा-रोधी भविष्य की रूपरेखा’ विषय पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने दुनिया के सामने पांच प्रमुख प्राथमिकताएं रखीं, जो आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा तय करेंगी।

मोदी ने अपने वीडियो संदेश में सबसे पहले उच्च शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों में आपदा-प्रबंधन और आपदा-प्रतिरोधी ढांचे को शामिल करने पर ज़ोर दिया। उनका मानना है कि इससे आने वाले समय के लिए एक सशक्त और प्रशिक्षित कार्यबल तैयार होगा। दूसरा, उन्होंने वैश्विक स्तर पर डिजिटलीकृत ज्ञान-संग्रह बनाने का सुझाव दिया, जहां विभिन्न देशों के अनुभव और ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ को एक जगह समेटा जाए।

तीसरी प्राथमिकता के रूप में प्रधानमंत्री ने विकासशील देशों के लिए इनोवेटिव फाइनेंसिंग मॉडल को अहम बताया। चौथा बिंदु था—छोटे द्वीपीय देशों को ‘लार्ज ओशन कंट्रीज़’ मानकर विशेष सहायता देना, क्योंकि ये क्षेत्र सबसे अधिक जलवायु जोखिमों से प्रभावित हैं। पांचवीं और अंतिम बात—सटीक प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मज़बूत करना और “लास्ट माइल कनेक्टिविटी” सुनिश्चित करना।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में बीते वर्षों में भारत द्वारा झेली गई त्रासदियों की भी चर्चा की—1999 का सुपर साइक्लोन और 2004 की सुनामी। उन्होंने बताया कि कैसे इन अनुभवों ने भारत को मजबूती से फिर से खड़े होने और बहुउद्देशीय आपदा शरणालयों और चेतावनी प्रणालियों के निर्माण की दिशा में अग्रसर किया।

सम्मेलन में कई अन्य वैश्विक नेताओं ने भी हिस्सा लिया। गुयाना के राष्ट्रपति इरफान अली ने जलवायु अनुकूलन के लिए संसाधनों को खोलने की अपील की, वहीं नाउरू के राष्ट्रपति डेविड अडेआंग ने इस सम्मेलन को “संवाद से समाधान की ओर कदम” बताया। एंटीगुआ और बारबुडा के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन ने कहा, “रेज़िलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर कोई विकल्प नहीं, बल्कि अस्तित्व की अनिवार्यता है।”

इस सम्मेलन में CDRI (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure) ने अफ्रीका में आपदा-रोधी ढांचे के विस्तार की प्रतिबद्धता दोहराई और 21 देशों के लिए 53 रिसर्च प्रोजेक्ट्स को अनुदान देने की घोषणा की। इसके अलावा छोटे द्वीप राष्ट्रों के लिए “रेज़िलिएंस एक्सेलेरेशन कॉल टू एक्शन” भी जारी किया गया।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक एम. मोपात्रा को जिनेवा में “UN ससाकावा अवॉर्ड 2025” से नवाज़ा गया, जो उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवातों के दौरान जानमाल की रक्षा के लिए उनके प्रयासों को मान्यता देता है।

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